सुंदरता 1. फूल के पत्तों में अटकी ओस की बूंद जैसी, फूल से भी कोमल सुबह की पहली किरण उसी बूंद से उठकर जैसे मन में बसी हो। 2. मुझे अबतक मालूम न था तुम इतनी सुंदर हो जब तुम पास होती थी मै था बेखबर जब नहीं हो तो तुम्हारी सुंदरता की कोई उपमा नहीं दिखती। 3. यह कैसी सुंदरता है साथ हो तो खुली आँख से न दिखनेवाली साथ नहीं हो तो बंद आँखों से दिखनेवाली 4. एकबार खोल दो न अपने लव बता दो खुद ही कि तुम क्यों इतनी सुंदर हो। ««« मूल नेपाली से अनुवादः कुमुद अधिकारी 1959 अप्रैल में जनमें कवि श्री विधान आचार्य, त्रिभुवन विश्वविद्यालय के लेक्चरॉर हैं। वाणी पुरस्कार, विराटनगर से नवाजे जा चुके तीन कविता कृति के रचयिता की कविताओं में प्रेम और सुंदरता का योग मिलता है। ««« स्वतंत्रता ? आर.आर.चौलागाईं नरेन्द्र आधुनिक विचारवाला युवक। पश्चिमी ढर्रे से पूरी तरह प्रभावित। रीति-रिवाज, परंपरा आदि उसके लिए कोई मायने नहीं रखते। जो मन में आया वही करता है। नरेन्द्र की पत्नी उर्मिला भी ठीक वैसी ही। कोई बंधन नहीं, नरेन्द्र से एक कदम आगे। दोनों की अच्छी-खासी नौकरी। भरपूर बैंक बैलेंस। गाड़ियाँ। नौकर नौकरानियाँ। एसो आराम। न अभाव, न अकाल। नरेन्द्र बाहर निकलने की तैयारी में। उर्मिला को बताता है- "दोस्त के यहाँ जा रहा हूँ। देर हो सकती है, रात वहीं गुजार सकता हूँ।" उर्मिला भी सजधजकर मायके जाने के लिए तैयार। शहर की एक गली जहाँ बहुत से होटल और लॉज ग्राहकों की प्रतिक्षा में। एक युवक एक लॉज में प्रवेश कर पूछता है- "आपके यहाँ.... की व्यवस्था है ?" "जी, जरूर ! आप पधारें तो सही।" युवक को एक कमरे में ले जाकर इंतजार करने को कहा गया है। वह उतावला हो रहा है। कुछ देर बाद किसी ने दरवाजा खटखटाया....। एक युवती भीतर आ रही है...। दोनो आमने सामने। "उर्मिला तुम ?" "नरेन्द्र तुम ?" ³³³ मूल नेपाली से अनुवादः कुमुद अधिकारी। ग्यारह पुस्तकों के रचयिता श्री आर.आर.चौलागाईँ हेटौडा में रहते हैं। ये ज्यादातर कविताएँ और लघुकथाएँ लिखते हैं। इन्हें आठ से ज्यादा पुरस्कार एवं सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
? विधान आचार्य
Saturday, July 5, 2008
अंक तेरह से
Posted by कुमुद अधिकारी at 9:49 PM
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1 comments:
प्रिय भाई कुमुद अधिकारी, आज ही 'हिन्दी साहित्य सरिता' को देखा-पढ़ा है। ब्लाग में आपका रचना-चयन और अनुवाद-कार्य दोनों ही सराहनीय हैं। इसमें प्रकाशित कविताओं, कहानियों और लघुकथाओं--यानी कि सभी विधाओं की रचनाओं से नेपाल का जन-मन झाँकता प्रतीत होता है। नेपाल में साहित्य का स्तर ऊँचा है, यह देखकर संतोष होता है। सम्भव है कि वर्तमान समय भि साहित्य की इस गति को कुछ और आयाम दे पाने में अपनी भूमिका निभाए। स्तरीय रचना-चयन हेतु एक बार फिर से बधाई!--बलराम अग्रवाल
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